शिमला
विख्यात चिकित्सक एवं स्वास्थ्य विभाग के उपनिदेशक डॉ रमेश चंद इन दिनों सोशल मीडिया के जरिए आमजनमानस में सड़क सुरक्षा, सतर्कता व जागरूकता की अलख जगाने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं ।
स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव सेवा और विशाल हृदय के मालिक डॉ रमेश चंद ने अपना जीवन मरीज की सेवा और जरूरतमंद की सहायता के लिए समर्पित किया है ।
टाटा संस् के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की और उनके अन्य सहयात्री जहाँगीर पंडोले की कार दुर्घटना में हुई मौत के पीछे के कारणों में पुलिस के मुताबिक “तेज रफ्तार” और चालक का गलत फैसला व पिछली सीट पर बैठे हुए दोनों सवारों का सीट बेल्ट नहीं लगाना हादसे की मुख्य वजह बने।
इस हादसे के बाद सबक के रूप में बहुत सी बातें सामने आईं । सरकार भी सचेत होकर पिछली सीट पर बैठने वालों के लिए एयरबैग की आवश्यकता पर बल दे रही है। केंद्रीय मोटर वाहन नियम 138(3) के नियमानुसार पिछली सीट पर बैठे व्यक्ति के सीट बेल्ट नहीं लगाने की सूरत में हजार रुपये के जुर्माने का नियम है । लेकिन लोग इससे वाकिफ नहीं और नजरअंदाजी जारी है । ट्रैफिक पुलिस भी इस ओर संजीदा नहीं । अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अब कार में बैठने वाले सभी लोगों के लिए सीट बेल्ट लगाना जरूरी होगा । केंद्र सरकार व्हीकल कम्पनियों के लिए अक्तूबर माह से आठ सीट वाले वाहनों में कम से कम 6 एयरबैग आवश्यक करने पर विचार कर रही है । सूत्र बताते हैं कि वाहन निर्माताओं के लिए पिछली सीट सवार के सुरक्षा के संबंध में “सीट बेल्ट अलार्म प्रणाली” योजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी में है।
भारत में एनसीआरबी की हादसों व आत्महत्याओं पर 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक सड़क हादसों में सबसे अधिक 59.7 फीसदी मौतों का मुख्य कारण तेज रफ्तार ही है।
ऐसे में दुर्घटनाओं और सड़क हादसों में कमी के प्रयासों को लेकर सरकार के साथ प्रत्येक नागरिक को हादसे के कारणों को जानकर सचेत और सतर्क रहकर एक सबक के रूप में जागरूकता की लौ जलानी होगी और हिमाचल के विख्यात चिकित्सक डॉ रमेश चंद हादसों की पीड़ा को समझते हुए एक जागरूक नागरिक की भूमिका निभाए जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं ।
इन दिनों डॉ रमेश चंद के सोशल मीडिया पर छेड़े गए “सड़क दुर्घटनाओं” से सचेत करते उनके अभियान के कुछ अंश आपके समक्ष रखते है ।
डॉ रमेश के अनुसार इन 10 मुख्य वजहों से होते हैं सड़क हादसे –
1• ओवर स्पीडिंग
भारत में ओवरस्पीडींग यानी की तेज गति से वाहन चलाना भी एक पैशन बनता नजर आ रहा है। जिस प्रकार देश में एक से बढ़कर एक हाई स्पीड वाहन आये हैं ठीक वैसे ही इनके प्रयोग से ओवरस्पीडिंग के चलते हादसों की संख्या भी बढ़ी है। तेज गति के चलते बहुत से लोगों ने सड़क पर दम तोड़ा है।
2• ड्रंक एंड ड्राइव
ड्रंक एंड ड्राइव, यानी की शराब पीकर गाड़ी चलाना। देश में होने वाले सड़क हादसों का सबसे मुख्य कारण ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ ही है। इसका प्रचलन युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है और थोड़े से एडवेंचर के चक्कर में न जाने कितने लोग नशे में सड़क पर मौत के खेल को अंजाम दे रहें हैं।
3• मोबाइल फोन का प्रयोग:
निश्चय ही आज के समय में मोबाइल फोन हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न अंग हो गया है। कभी-कभी तो हम मोबाइल के बिना अपने जीवन के बारें में कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। लेकिन यही मोबाइल देश में सड़क हादसों का मुख्य कारण बनता जा रहा है। आये दिन सड़क पर वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग करने के कारण कई लोग हादसों का शिकार होते हैं।
4• चालक का भ्रमित होना:
सड़क पर वाहन चलाते समय चालक ज्यादातर भ्रमित होते हैं, उनका ध्यान सड़क के बजाय इधर-उधर की बेवजह की बातों पर ज्यादा होता है। मसलन वाहन में चलता तेज संगीत, बातूनी सहयात्री आदि। इस कारण से भी देश में बहुत से हादसे हुए हैं।
5• रेड़ लाईट जंपिंग :
जल्दी तो आज के समय देश में हर किसी को बेवजह है, इसी के चलते हर कोई सड़क पर रेड लाईट क्रॉसिंग को तोड़ने में अपनी सफलता समझता है और दूसरे वाहनों के बारें में सोचना भूल जाता है।
6• सेफ्टी फीचर्स को नजरअंदाज:
वाहनों को लेकर जो धारणा है वो कुछ ऐसी है कि उनकी कार चमकदार, स्पेशिएस, स्पीडी और दमदार होनी चाहिये भले ही उसमे सुरक्षा फीचर्स की कमी हो। खैर ये तो बात च्वाइस की हो गई लेकिन जो स्टैंडर्ड फिचर्स है जैसे सीट बेल्ट आदि जो आज के समय में हर गाड़ी में मौजूद है उनका प्रयोग करने में भी लोग लापरवाही दिखाते हैं। शायद यही वजह है कि हादसों में मौत का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।
7• ओवरटेकिंग:
ऐसा कई बार देखा जाता है कि, सड़क पर वाहन चलाते समय लोग खुद को किसी रेसर से कम नहीं समझते हैं और ओवरटेकिंग करना अपना हुनर मानते हैं। ओवरटेक करना गलत नहीं है लेकिन गलत तरीके से ओवरटेक करना कतई सही नहीं है। इससे न केवल आपकी जान खतरे में होती है बल्कि सड़क पर मौजूद दूसरों की जिंदगी को भी आप खतरे में डालते हैं।
8• सड़क पर जानवर:
आज के समय में ये एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, कई बार सड़क पर जानवरों के आ जाने से हादसे होते हैं, और लोगों को अपनी जान तक से हाथ धोना पड़ता है।
9• सड़क के नियमों की अनदेखी:
ये बात तो दावे के साथ कही जा सकती है कि सड़क के नियमों के बारें में लगभग 75 प्रतिशत लोगों को जानकारी नहीं होती है। इसका मुख्य कारण गलत तरीके से लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस का मिल जाना भी है। सड़क पर नियमों के पालन न करने के चलते ही बहुत सारे हादसे होते हैं।
10• इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी:
यहां पर 350 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ने वाले वाहन तो मौजूद हैं लेकिन 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से भी वाहन चलाने योग्य सड़कें अभी नहीं हैं। सड़कों की खस्ता हालत भी सड़क हादसों का मुख्य कारण है।
डॉ रमेश चंद कहते हैं……
धीरे चलें,
सुरक्षित रहें!
जिंदगी ना मिलेगी दुबारा!!
ना महंगी गाड़ियां, न अच्छी-बुरी सड़कें, न पेरापिट न क्रैश बेरीयर, न सीट बेल्ट, न हेल्मेट आपको बचा पाएंगे, अगर आप बेहिसाब, बेतरतीब तरीके से सड़कों में गाड़ी चलाएंगे –
धीरे चलो,
धीरे चलो,
धीरे चलो,
शांति रखो!
गाड़ियों की ड्राइविंग सीट पर शांति रखो, किसी से उलझो मत सब को अपने रास्ते जाने दो, उचित दूरी रखो, नशे से दूर रहो!
अपनी,अपनों की और दूसरों की सुरक्षा आपके अपने हाथ में होती है,
आपके अपने जीवन की सुरक्षा आपकी अपनी सोच पर निर्भर करती है!
आपकी गाड़ियां,आपकी मोटर बाइकें आपकी सुविधा के लिये होती हैं,आपके आराम के लिये, आपके और आपके परिवार के सुख के लिये होती हैं, इन्हें “मौत का सामान” क्यों अपने हाथों बनाते हो!
आपकी जरा सी चूक से पल भर में क्या से क्या हो जाता है!
पीछे पछतावा और सिसकियों के अलावा कुछ नहीं बचता!
धीरे चलो, सुरक्षित चलो और लंबी खुशहाल ज़िन्दगी जियो!
अत्याधिक स्पीड पर मौत अंधी और बेरहम हो जाती है,
किसी का लिहाज नहीं करती !!!
पहाड़ों में सीट बेल्ट के इस्तेमाल के संदर्भ में डॉ रमेश चंद बड़े डिबेट किए जाने की आवश्यकता की बात कहते हैं ……
गाड़ियों में सीट बेल्ट लगाना जीवन रक्षक है, आगे की सीट हो या पीछे वाली! यह कानूनन जरूरी है-
पर हमारे पहाड़ों में ज्यादातर सड़क दुर्घटनाएं आमने-सामने की टक्कर से कम, ढलानों व खाईयों में लुढ़कने से ज्यादा होती हैं, इन परिस्थितियों में सीट बेल्ट लगी होना ज्यादा जानलेवा हो सकता है, कई सवारीयां छिटक कर बच भी जाती हैं, दुर्घटनाओं के दौरान बेल्ट से बंधी सवारीयों की खाई के अंतिम छोर तक पहुँच जाने की संभावना ज्यादा रहती है!
पहाड़ों में “सीट बेल्ट” के इस्तेमाल के सन्दर्भ में बड़े स्तर पर डिबेट की आवश्यकता है!
हमारे पहाड़ो में कम स्पीड, सुरक्षित ड्राइविंग पर ज्यादा जोर देने की आवश्यकता है!
आखिर में……
हम सभी को सचेत होकर नियम पालन करना होगा तभी आप और हम सुरक्षित होंगे ।

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