शिमला
कोविड-19 संक्रमण से जान गंवाने वाले अभागों के लिए उनकी अंतिम विदाई के रूप में कोरोना वारियर्स (योद्धा) बनकर आगे आए आईजीएमसी के सुरक्षाकर्मियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है । कोविड काल में निष्ठा से अपनी सेवाएं देने वाले सुरक्षाकर्मी अपनी नौकरी जाती देख हैरान व परेशान हैं ।
ऐसे में आईजीएमसी सुरक्षाकर्मी युनियन ने आज मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल को पत्र के माध्यम से कोविड काल के दौरान आईजीमसी में नियुक्त किए गए 13 सुरक्षाकर्मियों को नौकरी से न निकालने और उनकी सेवाओं को जारी रखने की गुहार लगाई है ।
आईजीएमसी सुरक्षाकर्मी युनियन प्रधान बबलू और महामंत्री प्रवीण शर्मा ने बताया कि कोविड काल में सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर सत्य निष्ठा से अपनी ड्यूटी निभाई है । युनियन प्रधान बबलू ने कहा कि आज यूनियन पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल व अस्पताल प्रशासन से सुरक्षाकर्मियों को नौकरी से न निकाले जाने की दरख्वास्त के साथ एक निवेदन पत्र पोस्ट किया है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी बात अवश्य सुनेगी और उनके पेट पर लात नहीं मारेगी ।
गौरतलब है कि कोविड-19 के समय जब पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ था और कोविड के दंश से अपनों को खो चुके परिवार वाले भी घातक संक्रमण की जद में आने के डर से अपनों के दाह संस्कार-रस्मों को निभाना तो दूर शव को छूने से भी पीछे हट गए थे। तब अस्पतालों में तैनात सुरक्षाकर्मी “कोविड वारियर्स” बनकर कोविड संक्रमण से जान गंवाने वाले अभागों के लिए इस संसार से उनकी अंतिम विदाई के लिए मसीहा की तरह आगे आए थे । सुरक्षाकर्मियों ने कोविड से जान गंवाने वाले अभागों के शवों को अस्पताल से न केवल शमशान तक पहुंचाया बल्कि उनको मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार तक किया ।
यहां बता दें कि कोविड काल के दौरान आईजीएमसी में 13 सुरक्षाकर्मियों, 46 सफाईकर्मी, 74 डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को नियुक्ति दी गई थी । इसी तरह के.एन.एच में भी नियुक्तियां दी गई थीं । ठेके पर चल रही इन सेवाओं के तीन माह से खत्म हो चुके टेंडर रिन्यू नहीं हो सके हैं । ऐसे में अस्पतालों में तैनात इन कर्मचारियों को अपनी भविष्य की चिंता सताने लगी है।
उधर आइजीएमसी एम.एस डॉ राहुल राव ने कहा कि इस संबंध में पूरे प्रदेश में एकसमान प्रक्रिया है और सरकार की ओर से किसी को नियुक्ति देने अथवा निकालने संबंधी कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं और न आइजीएमसी प्रशासन ने किसी को नौकरी से बाहर किया है । सरकार के जैसे आदेश आएंगे उस पर अमल किया जाएगा ।

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