“अरे पागलों गले च की है, उन्ना दे गले च सरस्वती मां है, उन्हानू देख सकदा है कोई” स्वर कोकिला सदा अमर रहेंगी : रमेश कुमार

“अरे पागलों गले च की है, उन्ना दे गले च सरस्वती मां है, उन्हानू देख सकदा है कोई” स्वर कोकिला सदा अमर रहेंगी

शिमला
कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं जो मर कर भी उनके चाहने वालों के दिलों में सदा जीवित रहती हैं। सुरीली आवाज की मल्लिका स्वर कोकिला स्वर्गीय लता मंगेशकर की आवाज का जादू संगीत के चाहवानों के सर चढ़ कर बोलता रहेगा । इसकी बानगी हमें तब देखने को मिली जब रेहड़ी पर लटके बस्ते से दिल को सूकूंन देने वाले दीदी के गीत लगातार बजते जा रहे थे और थोड़ी दूरी पर ही नगर निगम शिमला में कार्यरत सफाईकर्मी अपनी दिनचर्या को अंजाम दे रहा था । काम निपटा कर वो पलट कर बस्ते के समीप चैन से आ बैठता है। उत्सुकतावश हमने जब उनसे बात की तो रमेश नाम का यह सफाईकर्मी बोला साहब, “अपनी जिंदगी का सफर दीदी के साथ साथ चलता है ।” सवेरे बाई-पास से शुरू होने वाला रमेश कुमार का दैनिक कार्य लता के गानों के साथ ही शुरू होता है जहां-जहाँ वे जाते हैं बस्ते से निकलती सुरीली लता दीदी की मीठी आवाज भी उनके साथ-साथ जाती है।
रमेश कहते हैं लता जी के जाने का बहुत दुख हुआ, बाकी वो गई नहीं हैं वो हमारे साथ हैं वे आगे कहते हैं…. अस्सी वी चली जाणा है दुनिया तौं लेकिन सानु किसने याद करना लेकिन ये स्वर सुर के मालिक सदा जिएंगे।
दुनियां में न जाने ऐसे कितने रमेश हैं जिनकी मुहब्बत आवाज़ के इन फनकारों को हमेशा अमर रखेगी।