भाव से की गई शिव पूजा करती है भक्त का कल्याण : पंडित सुरेश भारद्वाज

शिमला
शिव पूजा के लिए सावन का महीना सबसे पवित्र महीना माना जाता है । शिव का मतलब है कल्याण और सूक्ष्मरूप से पूर्ण परमात्मा । हम इस संसार में पिंडी रूप में “सदाशिव” को मानते और पूजते आए हैं ।
सावन का महीना चल रहा है और भोलेनाथ के भक्त मंदिरों में अपनी हाजरी देना नहीं भूलते। पौ फटते ही पुरुष व महिला श्रद्धालु शिव पूजा में लीन हो ईश्वर के समक्ष नतमस्तक हो जाते हैं।
पंडित सुरेश भारद्वाज के अनुसार श्रावण माह में शिव परिवार पृथ्वी पर लोगों के कल्याण हेतु मौजूद रहता है ।
पंडित सुरेश भारद्वाज के अनुसार धारणा के अनुसार आजकल चौमासा चल रहा है तो हरिशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक ये वर्ष ऋतु के चार माह है जब भगवान विष्णु पाताल में राजा बली के पास चले जाते हैं तो जितने दिन तक भगवान विष्णु पाताल में रहते हैं तब तक शिव परिवार पृथ्वी पर लोगों का कल्याण करने के लिए रहता है।इस वजह से सावन का महीना शिव पूजा के लिए अति पवित्रतम मन जाता है ।
शिव पुराण में वर्णित शिव पूजा विधि के अनुसार सावन माह में शिव स्नान का बड़ा महत्व बतलाया गया है । शिव को जल अर्पित कर वस्त्र अर्पण करके जनेऊ धारण करवाने के उपरांत शिव तिलक कर चावल,फूल,फल व प्रसाद भेंट अर्पित कर शिव की पूजा और आरती करने वाले को भोलेनाथ अपना आशीर्वाद देकर कल्याण करते हैं । बेलपत्र का चढ़ावा भोलेनाथ को अति प्रसन्नता प्रदान करता है ।
पंडित सुरेश भारद्वाज के अनुसार, “बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव बहुत खुश होते हैं । लेकिन शिव पूजा के लिए सबसे अधिक भाब की आवश्यकता है ।भगवान शिव भोलेनाथ हैं और यदि भोले भाव से की गई पूजा में कोई त्रुटि भी रह जाती है तो भी “शिव पुराण” के अनुसार भाव से भोलेनाथ की शरण में आने वाले का व हर प्रकार से कल्याण करते हैं ।”
ईश्वर अपने भक्तों से हमेशा भाव के चाहवान रहे हैं । इस तरह भाव से की गई भोलेनाथ की पूजा और भाव से उनकी शरण में आने वाले का शिव हर प्रकार से कल्याण करते हैं ।