भाजपा व कांग्रेस, दोनों दलों ने फोरलेन प्रभावित किसानों के साथ किया धोखा : भूमि अधिग्रहण प्रभाबित मंच हिमाचल प्रदेश

शिमला

भूमि अधिग्रहण प्रभाबित मंच के अध्यक्ष बेली राम कौंडल ने कहा है कि पिछले चार साल से फोरलेन संघर्ष समिति व भूमि अधिग्रहण मंच अपनी आवाज़ उठाता रहा है ,सरकार हमेशा कहती आई है कि वो फोरलेन से प्रभावितों किसानों के बारे में चिंतित एवं संवेदनशील है। लेकिन कमेटी के सदस्य स्वयं इस समस्या को हल नहीं करना चाहते जबकि चार साल पहले, अक्टूबर 2018 को मंत्रिमंडल के सदस्य गोविन्द ठाकुर की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी लेकिन तब से अब तक कोई फैसला नहीं ले पाई हे और बड़ी हैरानी की बात है कि चार साल के उपरांत 1 अप्रैल 2022 को मंडी में नई कमेटी के अध्यक्ष मोहिंदर ठाकुर व अन्य सदस्य राकेश पठानिया व गोविन्द ठाकुर की अध्यक्षता में बैठक के अंदर प्रभाबित किसानो को आश्वासन दिया गया था कि इस संबंध में 15 दिनों के अंदर किसानो के हक में फैसला किया जायेगा और सरकार की स्वीकृति हेतु मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जायेगा । उन्होंने कहा कि बावजूद इसके बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि पिछले कल 5 मई को 3 सदस्य मंत्रीमंडल कमेटी की बैठक सचिवालय में की गई जिसमे चार गुणा मुआवजा़ देने में सहमति नहीं बन पाई, कमेटी अब बहाना ढूंढ रही है कि चार गुणा मुआवजे की अदायगी के लिए केन्द्रीय मंत्री गडकरी को पूछना होगा। जबकि वो पहले ही मनाली में कह कर गए थे कि यदि हिमाचल प्रदेश सरकार चार गुणा मुआवजा लोगों को देना चाहती है तो केन्द्रीय सरकार को उस में कोई एतराज़ नहीं होगा। दूसरी तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी मन कि बात में कह चुके हैं कि प्रभावित किसानो को चार गुना मुआबजा दिया जायेगा जिसको पूरी तरह से हिमाचल सरकार नजरअंदाज कर रही है और हिमाचल सरकार आगामी विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार के भ्रमित बयान जारी कर लोगों को गुमराह कर रही है।
मंच के सयोंजक, जोगिन्दर वालिया ने मुख्यमन्त्री जयराम ठाकुर से सवाल करते हुए पूछा है कि हाल ही में मुफ्त बिजली -पानी व बस किराए देने की घोषणा की गई थी, तब क्या केन्द्रीय सरकार को पूछा गया था , इसका मतलब साफ़ है कि भूमि-अधिग्रहण प्रभावितों के साथ सरेआम धोखा किया जा रहा है और आगामी चुनावों तक टाल-मटोल की निति अपनाई जा रही है। इसलिए प्रभाबित किसानों ने मन बना लिया है कि अगर भूमि अधिग्रहण कानून 2013 (चार गुना मुआबजा, पुनर्वास व् पुनर्स्थापना) को हिमाचल में लागु नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में सरकार के खिलाफ राज्यस्तरीय धरना/रैली का आयोजन किया जाएगा। सरकार आगामी विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार के भ्रमित व्यान जारी कर के लोगों को गुमराह कर रही है। कांग्रेस की पिछली सरकार ने 1 अप्रैल , 2015 को फैक्टर एक अर्थात दो गुणा मुआवजा़ अदायगी की अधिसूचना जारी की थी दूसरी तरफ भाजपा ने 2017 में चुनाबी बायदा (दृष्टी पत्र) जारी कर कहा था कि भाजपा सरकार बनेगी तो हम दो फैक्टर अर्थात चार गुणा मुआवजा प्रभाबित किसानों को देंगे। लेकिन दोनों दलों ने किसानों के साथ धोखा किया है, जिस का खामियाजा़ दोनों दलों को अगले चुनाव में भुगतना पड़ेगा।