ना महकी फुलवारी होती ख़ुशबू के घर ना होते, राधा की पायल कान्हा की वंशी के स्वर ना होते जीवन का ये रंग रंगीला उत्सव अम्बर थम जाता, मौत घरों में मातम करती यदि ये डॉक्टर न होते।”

शिमला
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर नोफल संस्था द्वारा आईजीएमसी और (डी.डी.यू) रिपन अस्पताल में डॉक्टरों के साथ केक काटकर उन्हें सम्मानित करते हुए, देश और प्रदेश के तमाम चिकित्सक वर्ग को डॉक्टर्स डे पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं संदेश दिया ।

भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ बिधान चन्द्र रॉय (डॉ.बी.सी.रॉय) को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के उद्देश्य से 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है।
इस अवसर पर आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ जनकराज ने कहा कि जो भी चिकित्सा के इस नोबल प्रोफेशन में आना चाह रहे हैं उनको मेरा संदेश रहेगा कि इस व्यवस्था में एक चिकित्सक के लिए मरीज सबसे महत्वपूर्ण है, जितना भी ऊंचा उठ जाएं मगर कभी अहंकार न पालें और डॉक्टर के नाते मरीज के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहें ।
डॉ जनकराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने काम को दूसरे को नुकसान न होने की मंशा के साथ करता है लेकिन जाने अनजाने कई बार ऐसे हादसे पेश आते हैं जो सबके लिए दुख का कारण बनते हैं ।
डॉ जनकराज ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर चिकित्सक वर्ग से आवाहन करते हुए कहा कि आईए ये प्रण लें कि अपने जीवनकाल में हम जरूरतमंदों के प्रति हम सदा मानवीय दृष्टिकोण से पेश आएंगे, ऐसी कामना करें ।