आवश्यकताआविष्कार की जननी है : तस्वीरें बोलती हैं वाहनों पर लकड़ी नुमा ढांचे पर लगी नुकीली कीलें बंदरों और लंगूरों के लिए संकेत हुई कि भैया इधर कूदे तो महीनों दर्द से बेचैनी और हर जख्म का हिसाब देना होगा

शिमला

पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण शिमला में बंदरों और लंगूरों की मौजूदगी आम जनमानस के लिए कभी कभी खासी मुसीबत भी बन जाती है जब इनकी अठखेलियाँ इंसान का नुकसान कर बैठती हैं ।
पानी की टंकी के साथ छेड़छाड़ के बाद जालीनुमा सुरक्षाकवच ईजाद हुआ तो वहीं पानी की टंकी के ढंकनो की सुरक्षा का जिम्मा टीन के तलवार नुमा कवच ने उठाया । कार मालिकों के लिए तो अपनी गाड़ी के छतों को बंदरों और लंगूरों की उछल कूद से बचाए रखना किसी चुनोती से कम नहीं रहा है,करें तो क्या करें । अब कांटों वाली झाड़ियां भी कार के छतों की कितनी रक्षा कर लेंगी सूखने पर बिखर ही तो जाएंगी और फिर मूवमेंट भी तो जरूरी है, करें तो क्या करें ।
ऐसे में अपना भारतीय जुगाड़ ही सही क्यों न हो, लक्ष्य तो एक ही है समस्या से छुटकारा या कहीं न कहीं रोक तो हो ही जाएगी।
ऐसे में आवश्यकता झलक उट्ठी, तो फिर क्या था आविष्कार भी हो गया । वाहनों पर लकड़ी नुमा ढांचे पर लगी नुकीली कीलें बंदरों और लंगूरों के लिए संकेत हो गईं कि भैया इधर कूदे तो महीनों दर्द से बेचैनी और एक एक जख्म का हिसाब देना होगा तो इस तरह आवश्यकता से आविष्कार का जन्म हुआ और फिर आविष्कार से समस्या का तात्कालिक समाधान हो गया ।